बुधवार 8 अप्रैल 2026 - 17:33
अमेरिका की ओर से ईरान की शर्तों को स्वीकार किए जाने पर सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद का बयान

ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने एलान किया है कि अमेरिका ने ईरान की पेश की गई शर्तों को सैद्धांतिक रूप से क़बूल कर लिया है, जिसके बाद अहम प्रगति के तौर पर दो हफ़्तों के लिए वार्ता का आग़ाज़ किया जा रहा है। हालाँकि, परिषद ने स्पष्ट किया है कि यह जंग के ख़ात्मे का एलान नहीं, बल्कि अंतिम फ़ैसले तक एक अहम मरहला है।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद  ने अमेरिका की ओर से ईरान की शर्तों को क़बूल किए जाने के हवाले से एक बयान जारी किया है। जिसका पूरा पाठ इस तरह है:

बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्राहीम

ईरान की सम्मानित, महान और बहादुर जनता की ख़िदमत में अर्ज़ है:

दुश्मन ने ईरान के ख़िलाफ़ अपनी ज़ालिमाना, ग़ैर-क़ानूनी और आपराधिक जंग में एक अप्रतिषेध, तारीख़ी और करारी हार खाई है। यह सफलता क्रांति के शहीद सुपीम लीडर हज़रत आयतुल्लाह अल-उज़मा इमाम ख़ामेनई के पाक ख़ून,सुप्रीम लीडर हज़रत आयतुल्लाह सैयद मुज्तबा ख़ामेनई (द) की रणनीति, और इस्लामी मुजाहिदीन की क़ुरबानियों, ख़ुसूसन आप प्रिया जनता की तारीख़ी और पुरजोश भागीदारी की बदौलत हासिल हुई है।

ईरान ने एक अज़ीम कामयाबी हासिल करते हुए अमेरिका को अपने 10- बिंदूई योजना को उसूली तौर पर क़बूल करने पर मजबूर कर दिया है। इस मनसूबे में निम्नलिखित बिंदु शामिल हैं:

  1. ईरान पर दोबारा हमला न करने की गारंटी
  2. हुर्मुज़ स्ट्रेट पर ईरान का कंट्रोल बरक़रार रहना
  3. यूरेनियम संवर्धन की मंज़ूरी
  4. तमाम बुनियादी और सनावी (द्वितीयक) प्रतिबंधों  का ख़ात्मा
  5. संयुक्त राष्ट्र की सलामती काउंसिल और दीगर इदारों की तमाम प्रस्तावों समापन
  6. ईरान को उसके नुक़सान का हर्जाना अदा करना
  7. क्षेत्र से अमेरिकी सेनाओं की पूर्ण वापसी
  8. तमाम मोर्चों पर जंग का ख़ात्मा, जिसमें लुबनान की प्रतिरोध आंदोलन के ख़िलाफ़ कार्रवाइयाँ भी शामिल हैं

हम इस कामयाबी पर तमाम ईरानी अवाम को मुबारकबाद पेश करते हैं और इस बात पर ज़ोर देते हैं कि इस कामयाबी की विवरण के अंतिम मरहले तक पहुँचने के लिए अब भी दृढ़ता, जिम्मेदार लोगों की दानिशमंदाना हिकमत-ए-अमली, और ईरानी अवाम के एकता व एकजुटता को बरक़रार रखना ज़रूरी है।

इस्लामी ईरान ने लुबनान, इराक़, यमन और अधिकृत फ़लस्तीन में प्रतिरोध के दिलेर मुजाहिदीन के साथ मिलकर बीते 40 दिनों में दुश्मन को ऐसे प्रहार पहुँचाए हैं जिन्हें वैश्विक तारीख़ कभी भूल नहीं करेगी। ईरान और प्रतिरोध धुरी ने, इंसानियत और शराफ़त के नुमाइंदों के तौर पर, इंसानियत के बदतरीन दुश्मनों के मुक़ाबले एक तारीख़ी जंग के बाद उन्हें ऐसा सबक़ सिखाया जो अविस्मरणीय है और उनकी सेनाओं, संसाधनों, बुनियादी ढाँचे और तमाम सियासी, आर्थिक, तकनीकी व सैन्य पूंजी को इस तरह तबाह कर दिया है कि दुश्मन अब पतन और बेबसी का शिकार हो चुका है और उसके पास अज़ीम ईरानी क़ौम और मेहवर-ए-मुक़ावमत के इरादे के सामने समर्पण ख़म करने के सिवा कोई रास्ता नहीं रहा।

जंग के शुरुआती दिनों में जब आपराधिक दुश्मनों ने यह ज़ालिमाना जंग शुरू की, तो उनका ख़याल था कि वह थोड़े वक़्त में मुकम्मल सैन्य श्रेष्ठता हासिल कर लेंगे और सियासी व सामाजिक अस्थिरता पैदा करके ईरान को घुटने टेकने पर मजबूर कर देंगे। वह समझते थे कि ईरान की मिसाइल और ड्रोन ताक़त जल्द ख़त्म हो जाएगी, और उन्हें यक़ीन नहीं था कि ईरान अपनी सरहदों से बाहर निकलकर पूरे क्षेत्र में इतना ताक़तवर जवाब दे सकेगा।

यहूदी साज़िशकारों ने अमेरिका के नादान राष्ट्रपति को संतुष्ट कर दिया था कि यह जंग ईरान का ख़ात्मा कर देगी और वह इंसानियत के इस आख़िरी मज़बूत क़िले को ख़त्म करके भविष्य में जिसके ख़िलाफ़ चाहें बिना डर के अपराध कर सकेंगे। वह यह ख़्वाब देख रहे थे कि अज़ीज़ ईरान को टुकड़ों में विभाजित करके उसके तेल और संसाधन लूट लेंगे और आख़िरकार ईरानी अवाम को लंबे अरसे तक अराजकता, ग़ैर-मुस्तक़र्री और अशांति में छोड़ देंगे।

इस्लाम के दिलेर मुजाहिदीन और मेहवर-ए-मुक़ावमत के उनके बहादुर सहयोगियों ने, इसके बावजूद कि उनके दिल अपने इमाम की शहादत के ग़म से ज़ख़्मी थे, ख़ुदा पर भरोसा करते हुए और सैयद-उश-शोहदा (इमाम हुसैन) के अनुसरण में फ़ैसला किया कि वह एक बार हमेशा के लिए दुश्मनों को तारीख़ी सबक़ सिखाएँगे, उनके तमाम पिछले जुर्मों का बदला लेंगे और ऐसे हालात पैदा करेंगे कि दुश्मन हमेशा के लिए ईरान पर आक्रामकता का ख़याल अपने दिमाग से निकाल दे और अज़ीम ईरानी क़ौम के सामने अपमान व बदनामी का मुकम्मल मज़ा चखे।

इस रणनीति और मुल्क में पैदा होने वाले बेमिसाल सियासी व इज्तिमाई एकता की बुनियाद पर, ईरान और मेहवर-ए-मुक़ावमत ने अमेरिका और सियोनी शासन के ख़िलाफ़ तारीख़ की सबसे भारी साझा जंग में से एक का आग़ाज़ किया और इस दौरान इस जंग के तमाम प्रारंभिक लक्ष्य हासिल किए जो पहले तै किए गए थे।

ईरान और मेहवर-ए-मुक़ावमत ने खित्ते में अमेरिकी फ़ौजी मशीनरी को लगभग मुकम्मल तौर पर तबाह कर दिया, दुश्मन की जानिब से सालों में ईरान के ख़िलाफ़ तैयार की गई तमाम बुनियादी ढाँचे और वसाइल को सख़्त और गहरे ज़रबात पहुँचाए, खित्ते के  विभिन्न मोर्चों पर अमेरिकी फ़ौज को भारी नुक़सानात से दो-चार किया, और अधिकृत इलाक़ों में दुश्मन की अफ़वाज, बुनियादी ढाँचे, वसाइल और संपत्तियों को तबाह-कुन ज़रबात पहुँचाकर हर मोर्चे पर दुश्मन के लिए मैदान तंग कर दिया। नतीजतन न सिर्फ दुश्मन के बुनियादी उद्देश्य हासिल नहीं हुए बल्कि जंग के आग़ाज़ के तक़रीबन 10 दिन बाद दुश्मन यह समझ गया कि वह इस जंग में कभी कामयाब नहीं हो सकता, और इसी वजह से मुख़्तलिफ़ साधनों से ईरान से संपर्क क़ायम करने और जंगबंदी की अनुरोध शुरू कर दी हैं।

ईरानी क़ौम को मालूम होना चाहिए कि आपके बहादुर बेटों की क़ुरबानियों और तारीख़ी मौजूदगी की बरकत से दुश्मन एक महीने से ज़्यादा अरसे से ईरान और मेहवर-ए-मुक़ावमत की तबाह-कुन ताक़त को रोकने के लिए गिड़गिड़ा कर रहा है, लेकिन मुल्क के अधिकारियों ने चूँकि आग़ाज़ से यह फ़ैसला कर रखा था कि जंग को उस वक़्त तक जारी रखा जाए जब तक दुश्मन को पछताना, बेबस होना और मुल्क के दीर्घकालिक ख़तरात का ख़ात्मा न हो, इसलिए तमाम दरख़्वास्तों को अस्वीकार कर दिया गया और जंग चालीसवें दिन तक जारी रही। ईरान ने इस दौरान अमेरिका के सदर की जानिब से दी गई अनेक आख़िरी अल्टीमेटम भी मुस्तरद कीं और वाज़ेह तौर पर कहा कि दुश्मन की किसी भी क़िस्म की धमकी या आख़िरी मुहलत को कोई अहमियत नहीं दी जाएगी।

अब हम अज़ीम ईरानी क़ौम को ख़ुशख़बरी देते हैं कि जंग के तक़रीबन तमाम लक्ष्य हासिल कर लिए गए हैं और आपके बहादुर बेटों ने दुश्मन को तारीख़ी बेबसी और स्थायी हार से दोचार कर दिया है। ईरान का तारीख़ी फ़ैसला, जिसके पीछे पूरी क़ौम की एकजुटता का सहारा मौजूद है, यह है कि यह जंग इतने अरसे तक जारी रहेगी जितना ज़रूरी हो ताकि इसके अज़ीम नतीजे मजबूत हों और खित्ते में नई सलामती और सियासी समानता ईरान और मेहवर-ए-मुक़ावमत की ताक़त और प्रभुसत्ता की बुनियाद पर क़ायम हो।

इसी परिप्रेक्ष्य में, और सुप्रीम लीडर हज़रत आयतुल्लाह सैयद मुज्तबा ख़ामेनई (द) की हिकमत-ए-अमली और आला सलामती काउंसिल की मंज़ूरी के मुताबिक़, और युद्धक्षेत्र में ईरान और मेहवर-ए-मुक़ावमत की वर्चस्व और दुश्मन की तमाम दावों के बावजूद अपनी धमकियों पर असमर्थता, और ईरानी अवाम के न्यायोचित माँगों की सरकारी तौर पर मंज़ूरी के ध्यान में रखते हुए फ़ैसला किया गया है कि तफ़सीलात को अंतिम शक्ल देने के लिए वार्ता इस्लामाबाद में होंगी ताकि ज़्यादा से ज़्यादा 15 दिन के अंदर मैदान-ए-जंग में ईरान की फ़तह के तमाम पहलुओं को सियासी मुज़ाकरात में भी मजबूत किया जा सके।

इस सिलसिले में ईरान ने दुश्मन के पेश किए गए तमाम मनसूबों को मुस्तरद करते हुए एक 10-नुक़ाती  योजना बनाया और उसे पाकिस्तान के ज़रिए अमेरिकी पक्ष को पेश किया, जिसमें ईरानी मुसल्लह सशस्त्र बलों के साथ मिलकर आबनाए-हुरमुज़ के ज़रिए नियंत्रित मार्ग) जैसे बुनियादी बिंदुओं पर ज़ोर दिया गया, जिससे ईरान को एक अद्वितीय इक़्तिसादी और भौगोलिक हैसियत हासिल होगी, जो कि तमाम जंगी तत्वों के ख़िलाफ़ जंग की ज़रूरत है। इसका मतलब बच्चों के क़ातिल इसराइली सरकार की आक्रामकता की तारीख़ी शिकस्त, खित्ते में तमाम अड्डों और स्थापना स्थानों से अमेरिकी लड़ाकू सेनाओं की वापसी, हुरमुज़ स्ट्रेट में एक सुरक्षित ट्रांज़िट प्रोटोकॉल का इस तरह से क़याम है जो तै-शुदा प्रोटोकॉल के मुताबिक़ ईरान के प्रभुत्व की ज़मानत देता है, ईरान के तमाम नुक़सानात की मुकम्मल भुगतान और दूसरे अनुमान के मुताबिक़ ईरान को होने वाले नुक़सानात की इब्तिदाई अदाइगी। बोर्ड ऑफ गवर्नर्स और सलामती काउंसिल की प्रस्ताव, बैरूने विदेशों में जमे हुए तमाम ईरानी संपत्तियों और संपत्तियों की रिहाई और आख़िर में सलामती काउंसिल की एक बाध्यकारी प्रस्ताव में इन तमाम मामलों की पुष्टि। वाज़ेह रहे कि इस क़रारदाद की तौसीक़ इन तमाम समझौतों को अंतर्राष्ट्रीय क़ानून का पाबंद बना देगी और ईरानी क़ौम के लिए एक अहम राजनयिक विजय पैदा करेगी।

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने ईरान सूचित किया है कि अमेरिकी पक्ष ने तमाम स्पष्ट धमकियों के बावजूद इन सिद्धांतों को मुज़ाकरात की बुनियाद के तौर पर क़बूल कर लिया है और ईरानी अवाम की इच्छा के सामने हथियार डाल दिए हैं। इसके मुताबिक़ उच्च स्तर पर यह फ़ैसला किया गया कि ईरान सिर्फ़ इन उसूलों की बुनियाद पर इस्लामाबाद में अमेरिकी फ़रीक़ के साथ दो हफ़्ते तक वार्ता करेगा। इस बात पर ज़ोर दिया गया कि इसका मतलब जंग का ख़ात्मा नहीं है और ईरान जंग के ख़ात्मे को उसी वक़्त क़बूल करेगा जब 10-नुक़ाती मनसूबे में ईरान की तरफ़ से पेश किए गए उसूलों को स्वीकार करते हुए इसकी तफ़सीलात को भी मुज़ाकरात में हत्मी शक्ल दी जाए।

यह मुज़ाकरात 10 अप्रैल 2026 शुक्रवार इस्लामाबाद में शुरू होंगे और ईरान इस मुज़ाकरात के लिए दो हफ़्ते का वक़्त निर्धारित करेगा। यह अवधि दोनों पक्षों की सहमति से बढ़ाई जा सकती है। इस दौरान आवश्यक है कि राष्ट्रीय एकजुटता मुकम्मल तौर पर बरक़रार रहे और विजय के जश्न उत्साह के साथ जारी रहें।

अगर दुश्मन मैदान में सिर-ए-तस्लीम ख़म करता है और यह मुज़ाकरात में एक निर्णायक सियासी कामयाबी में बदल जाए, तो हम सब मिलकर इस अज़ीम तारीख़ी फ़तह का जश्न मनाएँगे। अन्यथा हम मैदान में एक साथ लड़ते रहेंगे जब तक कि ईरानी क़ौम के तमाम जाइज़ मुतालिबात पूरे न हो जाएँ। हमारे हाथ ट्रिगर पर हैं, और जैसे ही दुश्मन की तरफ़ से कोई भी छोटी सी ग़लती होगी, हम उसे पूरी ताक़त के साथ जवाब देंगे।

सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद
8 अप्रैल 2026

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